भोपाल मध्यप्रदेश राजनीति

अटलजी ने देश को सूचना, शिक्षा, खाद्य और रोजगार के अधिकार की अवधारणा और दृष्टि दी सत्ता को सुशासन और सेवा का उपकरण बनाया : रजनीश अग्रवाल

अटलजी ने देश को सूचना, शिक्षा, खाद्य और रोजगार के अधिकार की अवधारणा और दृष्टि दी सत्ता को सुशासन और सेवा का उपकरण बनाया : रजनीश अग्रवाल

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटलबिहारी वाजपेयी ने भारत में सत्ता को सुशासन और सेवा का परिणामकारी उपकरण बनाया। अटल जी की सरकार ने सूचनाशिक्षाखाद्य और रोजगार के अधिकार के क्रन्तिकारी निर्णय लिए जिन्हें यूपीए सरकार ने नाम बदलकर अपने खाते में जोड़ लिया। आज अटलजी के जन्मदिन पर कांग्रेस को भी अपना कृतज्ञभाव प्रगट कर देश के सामने सच बताना चाहिए। अटलजी की दूरदृष्टि और पक्कों इरादों से देश मजबूती से आगे बढ़ा। उनके जन्मदिन पर देश उनका आभार प्रगट कर रहा है।

उन्होंने कहा कि आरटीआई जिसे अटलजी की सरकार ने द फ्रीडम ऑफ इनफार्मेशन एक्ट, 2002  (6 जनवरी, 2003) के माध्यम से देश के सामने न केवल सूचना के अधिकार की अवधारणा रखी थी बल्कि कानून के रूप में लागू करने का प्रयास किया था। अटलजी ने 2002 मेंसंविधान में छियासीवें संशोधन कर शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाया। शिक्षा को मौलिक अधिकार देकर14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से देश में शिक्षा क्रांति लाई। जिसे बाद आरटीई के रूप में यूपीए ने अपने नाम कैश कराने का काम किया। अटलजी की सरकार द्वारा हर गरीब को दो जून की रोटी पाने का अधिकार मिले इस उद्देश्य से ‘‘अन्त्योदय अन्न योजना’’ (एएवाई) को दिसंबर, 2000 में शुरू किया गया था। अन्त्योदय अन्न योजनाराज्यों में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत आने वाले बीपीएल परिवारों में से अत्यंत गरीब परिवारों की पहचान करके अत्यधिक रियायती दर पर यानी 2 रू. प्रति किलो गेहूँ और 3 रू. प्रति किलो चावल उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था। इस दृष्टि को रखने वाले अटल जी पहले प्रधानमंत्री थे। जिसे यूपीए के जमाने से खाद्य सुरक्षा कानून के रूप में जाना जाने लगा।

 रजनीश अग्रवाल ने कहा कि अटलजी की सरकार ने पहली बार देश में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना 25 सितम्बर 2001 को लागु किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ दिहाड़ी रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करना रहा। कार्यक्रम का लक्ष्य समाज के कमजोर वर्गोंविशेषकर महिलाओंअनुसूचित जातियोंअनुसूचित जनजातियों और जोखिमपूर्ण व्यवसायों से हटाए गए बच्चों के अभिभावकों पर विशेष ध्यान देना था। गरीबी की रेखा से ऊपर के लोगों को भी रोजगार मुहैया कराने का प्रावधान किया। बाद में मनरेगा के रूप में इन्ही तमाम नियमों के साथ इसे यूपीए सरकार ने लागू किया। आज भाजपा ने अपने पहले प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में सत्ता के द्वारा सुशासन और सेवा की जो संकल्पना रखी थी उसे लगातार मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान साकार कर रहे हैं। 

Topics


Pin It on Pinterest

Share This